भूस्वामित्व अभिलेखों पर अकबर और टोडरमल की उपस्थिति

''काल गणना’’
काल गणना से संबंधित किसी पोस्ट में मैने बताया था कि सन् 20817 ई0 ऐसा समय होगा जब क्रिश्चियन और इस्लाम का अंतर समाप्त हो जायगा यानी क्रिश्चियन ग्रेगेरियन कलेन्डर और हिजरी कलेन्डर में ऐक जैसा वर्ष सन् 20817 हि0/ई0होगा। 
अब बात करतें हैं ऐक और ऐसे कलेन्डर की जिसमें और हिजरी वर्ष में कोई अन्तर न था। वह वर्ष था सन् 1556 ई0 का जब अकबर का राज्यारोहण हुआ था। इस वर्ष की हिजरी संवत 963 हि0 थी। अकबर के नवरत्नों में से एक टोडरमल थे जिन्होने अकबर के समय में समूचे साम्राज्य की भूमि का बन्दोबस्त कराया था। टोडरमल ने राज्य की समूची भूमि को उसकी श्रेणी और स्वामित्व के आधार पर वर्गीक्रत करते हुये इसका अभिलेखीकरण कराया था। भूअभिलेखोें को खतौनी का विशिष्ट नाम भी इसी काल में मिला। भूअभिलेखों का मुख्य सरोकार खेती अथवा फसल से होता था इसलिये इसके सामयिक विभाजन को फसल की उत्पादकता से जोडा गया और इस सामयिक विभाजन को ऐक खास नाम दिया गया फसली वर्ष और अकबर के राज्यारोहण के हिजरी वर्ष संवत 963 हि0 की संख्या 963 को यथावत फसली वर्ष 963 के रूप में अंकित किया गया। 
ग्रेगेरियन कलेन्डर के अनुरूप यह फसली वर्ष भी 365-66 दिन का होता है परन्तु इसका आरंभ ग्रेगेरियन कलेन्डर के 1 जुलाई की तिथि से होता है तथा इसकी समाप्ति अगले वर्ष 30 जून को होती है। बीती 30 जून को 1424 फसली वर्ष समाप्त हुआ है और 1425 फसली वर्ष आरंभ हुआ है जो 30 जून 2018 तक रहेगा। 
इससे ऐसा भान होता है कि हिजरी और फसली सन् ऐक साथ परिवर्तित होती होगी लेकिन ऐसा नहीं है । वर्तमान हिजरी वर्ष 1438 हिजरी चल रहा है परन्तु फसली वर्ष 1425-26 है। यह अंतर इसलिये आया क्योंकि हिजरी वर्ष सामान्य सौर वर्ष से 11-12 दिन छोटा होता है। यह अंतर 32सौर वर्ष में इतना बढ जाता है कि ऐक अतिरिक्त हिजरी वर्ष समायोजित हो सके। इसीलिये 963 हि0 वर्ष के अवसर पर आरंभ हुआ फसली वर्ष 972 अब 1438हि0 तक आते आते फसली वर्ष 1425 ही हो सका है।
अगली बार जब आप अपने खेती की भूमि के अभिलेख खतौनी को निहारियेगा तो उस पर अंकित फसली वर्ष को देखकर सम्राट अकबर और उसके नवरत्न टोडरमल को याद करना मत भूलियेगा जिन्होंने आपके भूस्वामित्व अभिलेखों पर हमेशा के लिये अपनी उपस्थिति अंकित करा रखी है।

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